बालकाण्ड · दोहा 268 · दोहा/सोरठा
सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।
सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।
धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप।।268।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.268 · पुस्तक पृ. 258, 258
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।
वेश शांत था, पर कर्म कठोर थे; उनके स्वरूप का वर्णन नहीं किया जा सकता।
English explanation
His appearance was peaceful, but his deeds were stern; his form could not be adequately described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सांत | शांत | peaceful; tranquil |
| बेषु | वेश; बाहरी रूप | dress; outward appearance |
| करनी | करनी; आचरण और कर्म | conduct; deeds |
| कठिन | कठोर | stern; severe |
| बरनि | वर्णन करके | by describing |
| न | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| सरुप | स्वरूप; रूप | form; appearance |
2 धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप।।268।।
मानो वीर रस मुनि का शरीर धारण करके वहाँ आया हो, जहाँ सभी राजा थे।
English explanation
It was as though the heroic sentiment itself had assumed a sage’s body and come to where all the kings were gathered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरि | धारण करके | having assumed |
| मुनितनु | मुनि का शरीर | a sage’s body |
| जनु | मानो | as though |
| बीर | वीरता का; वीर | heroic |
| रसु | रस; भावात्मक सौंदर्य-अनुभूति | rasa; aesthetic sentiment |
| आयउ | आया | came; arrived |
| जहँ | जहाँ | where |
| सब | सभी | all |
| भूप | राजा | kings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 268
- स्रोत अभिलेख
- 1.268
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 258, 258
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