बालकाण्ड · दोहा 269 · दोहा/सोरठा
बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।
बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।
पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.269 · पुस्तक पृ. 258, 259
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।
फिर जनक की ओर देखकर परशुराम ने कहा, ‘बताइए, इतनी अधिक भीड़ क्यों है?’
English explanation
Then, looking toward Janaka, Parashurama said, ‘Tell me, why is there such a great crowd?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| बिलोकि | देखकर | looking toward |
| बिदेह | विदेह राजा जनक | Janaka, king of Videha |
| सन | से | to |
| कहहु | बताइए | tell me |
| काह | क्यों; किसलिए | why; for what purpose |
| अति | बहुत अधिक | so great |
| भीर | भीड़ | a crowd |
2 पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।
जानते हुए भी वे अनजान की तरह पूछ रहे थे; उनके शरीर में क्रोध व्याप्त हो गया था।
English explanation
Though he knew, he asked as if unaware; anger had pervaded his body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूछत | पूछते हैं | asks |
| जानि | जानते हुए भी | though knowing |
| अजान | अनजान व्यक्ति | one who is unaware |
| जिमि | की तरह | like |
| ब्यापेउ | व्याप्त हो गया | pervaded |
| कोपु | क्रोध | anger |
| सरीर | शरीर में | the body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 269
- स्रोत अभिलेख
- 1.269
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 258, 259
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।