बालकाण्ड · दोहा 266 · दोहा/सोरठा
देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।
देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।
लखन रोषु पावकु प्रबल जानि सलभ जनि होहु।।266।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.266 · पुस्तक पृ. 256, 257
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।
‘ईर्ष्या, अहंकार और क्रोध छोड़कर राम को आँख भरकर देखो।’
English explanation
“Abandon envy, arrogance, and anger, and gaze fully upon Rama.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखहु | देखो | look upon |
| रामहि | राम को | Rama |
| नयन | आँखें | your eyes |
| भरि | भरकर; जी भरकर | to their fill |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| इरिषा | ईर्ष्या | envy |
| मदु | अहंकार | arrogance |
| कोहु | क्रोध | anger |
2 लखन रोषु पावकु प्रबल जानि सलभ जनि होहु।।266।।
‘लक्ष्मण के क्रोध को प्रचंड अग्नि जानकर, उसके सामने पतंगे मत बनो।’
English explanation
“Knowing Lakshmana’s anger to be a raging fire, do not become moths before it.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण का | Lakshmana’s |
| रोषु | क्रोध | anger |
| पावकु | अग्नि | fire |
| प्रबल | प्रचंड | raging; powerful |
| जानि | जानकर; समझकर | recognizing as |
| सलभ | पतंगे | moths |
| जनि | मत | do not |
| होहु | बनो | become |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 266
- स्रोत अभिलेख
- 1.266
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 256, 257
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