बालकाण्ड · दोहा 13 · दोहा/सोरठा
अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।
अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।
चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं।।13।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.13 · पुस्तक पृ. 34, 35
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।
जो बड़ी नदियाँ अत्यंत अपार हैं, उन पर यदि राजा पुल बनवा दें—
English explanation
If kings have bridges built across great rivers that are immensely difficult to cross—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | immensely |
| अपार | पार करना कठिन | difficult to cross |
| जे | जो | which |
| सरित | नदियाँ | rivers |
| बर | बड़ी, श्रेष्ठ | great |
| जौं | यदि | if |
| नृप | राजा | kings |
| सेतु | पुल | bridges |
| कराहिं | बनवा दें | have built |
2 चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं।।13।।
तो अत्यंत छोटी चींटियाँ भी उन पर चढ़कर बिना परिश्रम उस पार चली जाती हैं।
English explanation
Then even the tiniest ants can climb onto them and reach the other side without effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढि | चढ़कर | having climbed onto them |
| पिपीलिकउ | चींटियाँ भी | even ants |
| परम | अत्यंत | extremely |
| लघु | छोटी | small |
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | परिश्रम | effort |
| पारहि | उस पार | to the other side |
| जाहिं | चली जाती हैं | go across |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13
- स्रोत अभिलेख
- 1.13
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 34, 35
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