बालकाण्ड · दोहा 12 · दोहा/सोरठा
सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।
सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।
नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान।।12।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 33, 33
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।
सरस्वती, शेष, शिव, ब्रह्मा तथा आगम, वेद और पुराण—
English explanation
Saraswati, Shesha, Shiva, Brahma, and the Agamas, Vedas, and Puranas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारद | विद्या और वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of learning and speech |
| सेस | शेषनाग | Shesha, the cosmic serpent |
| महेस | भगवान शिव | Lord Shiva |
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| आगम | आगम शास्त्र | the Agama scriptures |
| निगम | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण ग्रंथ | the Puranas |
2 नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान।।12।।
जिन राम के गुणों का वे निरंतर गान करते हैं, ‘नेति, नेति’—अर्थात इतना ही नहीं, इतना ही नहीं—कहते हुए।
English explanation
They continually sing Rama's virtues, saying 'not this alone, not this alone,' acknowledging that no description exhausts them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नेति | इतना ही नहीं; यह नहीं | not this; not this alone |
| नेति | इतना ही नहीं; यह नहीं | not this; not this alone |
| कहि | कहकर; कहते हुए | saying |
| जासु | जिनके; उन राम के | whose; Rama's |
| गुन | गुणों का | virtues |
| करहिं | करते हैं | perform; do |
| निरंतर | लगातार; सदा | continually |
| गान | गान; गुणगान | singing; praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 12
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 33, 33
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