बालकाण्ड · दोहा 11 · दोहा/सोरठा
जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।
जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।
पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।11।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 32, 32
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।
उन मोतियों को युक्ति से छेदकर फिर रामचरित रूपी उत्तम धागे में पिरोया जाता है।
English explanation
Those pearls are skillfully pierced and then strung on the excellent thread of Rama’s story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जुगुति | युक्ति से; कुशलता से | skillfully; with artful method |
| बेधि | छेदकर | having pierced |
| पुनि | फिर | then |
| पोहिअहिं | पिरोए जाते हैं | are strung |
| रामचरित | राम के चरित्र रूपी | in the form of Rama’s story |
| बर | उत्तम | excellent |
| ताग | धागे में | on a thread |
2 पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।11।।
सज्जन उन्हें अपने निर्मल हृदय पर पहनते हैं; अत्यंत अनुराग से उनकी शोभा होती है।
English explanation
Good people wear them over their pure hearts, where they shine with deep loving attachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पहिरहिं | पहनते हैं | wear |
| सज्जन | सज्जन लोग | good people |
| बिमल | निर्मल; शुद्ध | pure; spotless |
| उर | हृदय पर; वक्ष पर | over the heart; on the breast |
| सोभा | शोभा होती है | beauty shines |
| अति | अत्यंत | deep; very great |
| अनुराग | प्रेम; अनुराग से | with loving attachment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 32, 32
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