बालकाण्ड · छंद · छंद
लागे पखारन पाय पंकज प्रेम तन पुलकावली।
मूल पाठ
लागे पखारन पाय पंकज प्रेम तन पुलकावली।
नभ नगर गान निसान जय धुनि उमगि जनु चहुँ दिसि चली॥
जे पद सरोज मनोज अरि उर सर सदैव बिराजहीं।
जे सकृत सुमिरत बिमलता मन सकल कलि मल भाजहीं॥
स्रोत अभिलेख 1.324 · पुस्तक पृ. 305, 306
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे श्रीरामजीके चरणकमलोंको पखारने लगे, प्रेमसे उनके शरीरमें पुलकावली छा रही है। आकाश और नगरमें होनेवाली गान, नगाड़े और जय-जयकारकी ध्वनि मानो चारों दिशाओंमें उमड़ चली। जो चरणकमल कामदेवके शत्रु श्रीशिवजीके हृदयरूपी सरोवरमें सदा ही विराजते हैं, जिनका एक बार भी स्मरण करनेसे मनमें निर्मलता आ जाती है और कलियुगके सारे पाप भाग जाते हैं,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 306 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1लागे पखारन पाय पंकज प्रेम तन पुलकावली।
English explanation
AI-generated meaning draft: Janaka began washing Rama’s lotus-like feet, his body thrilled with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागे | लगे | began |
| पखारन | धोने | washing |
| पाय | चरण | feet |
| पंकज | कमल-समान | lotus-like |
| प्रेम | प्रेम से | from love |
| तन | शरीर में | on the body |
| पुलकावली | रोमांच की पंक्तियाँ | waves of goosebumps |
2नभ नगर गान निसान जय धुनि उमगि जनु चहुँ दिसि चली॥
English explanation
In the sky and city, songs, kettledrums, and cries of victory seemed to swell and spread in all four directions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नभ | आकाश में | in the sky |
| नगर | नगर में | in the city |
| गान | गीत | songs |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
| जय | जयघोष | cries of victory |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| उमगि | उमड़कर | swelling |
| जनु | मानो | as though |
| चहुँ | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| चली | फैल चली | spread |
3जे पद सरोज मनोज अरि उर सर सदैव बिराजहीं।
English explanation
Those lotus feet which ever dwell in the heart-lake of Shiva, the foe of the god of desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | which |
| पद | चरण | feet |
| सरोज | कमल | lotuses |
| मनोज | कामदेव के | of the god of desire |
| अरि | शत्रु शिव | the foe, Shiva |
| उर | हृदय | heart |
| सर | सरोवर में | in the lake |
| सदैव | सदा | always |
| बिराजहीं | विराजते हैं | dwell gloriously |
4जे सकृत सुमिरत बिमलता मन सकल कलि मल भाजहीं॥
English explanation
Remembering them even once purifies the mind and drives away all the impurities of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिनका | which |
| सकृत | एक बार | once |
| सुमिरत | स्मरण करने पर | upon remembering |
| बिमलता | निर्मलता | purity |
| मन | मन में | in the mind |
| सकल | सभी | all |
| कलि | कलियुग के | of the age of Kali |
| मल | मल-दोष | impurities |
| भाजहीं | भाग जाते हैं | flee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 306
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 305, 306
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।