बालकाण्ड · छंद · छंद
जे परसि मुनिबनिता लही गति रही जो पातकमई।
मूल पाठ
जे परसि मुनिबनिता लही गति रही जो पातकमई।
मकरंदु जिन्ह को संभु सिर सुचिता अवधि सुर बरनई॥
करि मधुप मन मुनि जोगिजन जे सेइ अभिमत गति लहैं।
ते पद पखारत भाग्यभाजनु जनकु जय जय सब कहैं॥
स्रोत अभिलेख 1.324 · पुस्तक पृ. 305, 306
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनका स्पर्श पाकर गौतम मुनिकी स्त्री अहल्याने, जो पापमयी थी, परमगति पायी, जिन चरणकमलोंका मकरन्दरस (गङ्गाजी) शिवजीके मस्तकपर विराजमान है, जिसको देवता पवित्रताकी सीमा बताते हैं; मुनि और योगीजन अपने मनको भौंरा बनाकर जिन चरणकमलोंका सेवन करके मनोवाञ्छित गति प्राप्त करते हैं; उन्हीं चरणोंको भाग्यके पात्र (बड़भागी) जनकजी धो रहे हैं; यह देखकर सब जय-जयकार कर रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 306 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जे परसि मुनिबनिता लही गति रही जो पातकमई।
English explanation
Through their touch, Ahalya, the sage’s wife who had been afflicted by sin, attained deliverance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन्हें | which |
| परसि | स्पर्श करके | through touching |
| मुनिबनिता | मुनि की पत्नी अहल्या | Ahalya, the sage’s wife |
| लही | पाई | attained |
| गति | मुक्ति | deliverance |
| रही | रही थी | had been |
| जो | जो | who |
| पातकमई | पापग्रस्त | afflicted by sin |
2मकरंदु जिन्ह को संभु सिर सुचिता अवधि सुर बरनई॥
English explanation
The nectar of those feet rests on Shiva’s head, and the gods describe it as the utmost purity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मकरंदु | कमलों का मधुर रस | lotus nectar |
| जिन्ह | जिन चरणों | those feet |
| को | का | of |
| संभु | शिव के | of Shiva |
| सिर | सिर पर | on the head |
| सुचिता | पवित्रता की | of purity |
| अवधि | परम सीमा | utmost limit |
| सुर | देवता | the gods |
| बरनई | वर्णन करते हैं | describe |
3करि मधुप मन मुनि जोगिजन जे सेइ अभिमत गति लहैं।
English explanation
Sages and yogis make their minds into bees, worship those feet, and attain their desired spiritual goal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | बनाकर | making |
| मधुप | भौंरा | a bee |
| मन | मन को | the mind |
| मुनि | मुनि | sages |
| जोगिजन | योगीजन | practitioners of yoga |
| जे | जिन चरणों को | those feet which |
| सेइ | सेवकर | by worshipping |
| अभिमत | मनचाही | desired |
| गति | आध्यात्मिक गति | spiritual goal |
| लहैं | पाते हैं | attain |
4ते पद पखारत भाग्यभाजनु जनकु जय जय सब कहैं॥
English explanation
Janaka, blessed with great good fortune, washes those very feet, while everyone cries, ‘Glory! Glory!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे ही | those very |
| पद | चरण | feet |
| पखारत | धो रहे हैं | is washing |
| भाग्यभाजनु | सौभाग्य के पात्र | recipient of good fortune |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| जय | जय हो | glory |
| जय | जय हो | glory |
| सब | सभी | everyone |
| कहैं | कहते हैं | says |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 306
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 305, 306
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।