बालकाण्ड · छंद · छंद
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
मूल पाठ
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥
एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥
स्रोत अभिलेख 1.236 · पुस्तक पृ. 230, 231
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही स्वभावसे ही सुन्दर साँवला वर (श्रीरामचन्द्रजी) तुमको मिलेगा। वह दयाका खजाना और सुजान (सर्वज्ञ) है, तुम्हारे शील और स्नेहको जानता है। इस प्रकार श्रीगौरीजीका आशीर्वाद सुनकर जानकीजीसमेत सब सखियाँ हृदयमें हॢषत हुईं। तुलसीदासजी कहते हैं—भवानीजीको बार-बार पूजकर सीताजी प्रसन्न मनसे राजमहलको लौट चलीं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 231 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
English explanation
AI-generated interpretive draft: You will receive as your bridegroom the one to whom your heart is drawn, naturally handsome and dark-complexioned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनु | मन | heart; mind |
| जाहिं | जिसमें; जिस व्यक्ति में | in whom |
| राचेउ | अनुरक्त हुआ है | has become absorbed in love |
| मिलिहि | मिलेगा | will be obtained |
| सो | वही | that very one |
| बरु | वर; भावी पति | bridegroom; husband-to-be |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| साँवरो | साँवले वर्ण वाला | dark-complexioned |
2करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥
English explanation
He is a storehouse of compassion and discerning; he knows your virtuous character and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करुना | करुणा | compassion |
| निधान | भंडार; आश्रय | storehouse; repository |
| सुजान | सुजान; भलीभाँति समझने वाले | wise and discerning |
| सीलु | शील; सदाचारी स्वभाव | virtuous character |
| सनेहु | स्नेह; प्रेम | affection; love |
| जानत | जानते हैं | knows |
| रावरो | तुम्हारा | your |
3एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली।
English explanation
Hearing Gauri’s blessing in this manner, the companions, together with Sita, rejoiced in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| भाँति | प्रकार | manner |
| गौरि | गौरी; देवी पार्वती का | of Gauri, the goddess Parvati |
| असीस | आशीर्वाद | blessing |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिय | सीता | Sita |
| सहित | के साथ | together with |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषीं | हर्षित हुईं | rejoiced |
| अली | सखियाँ | female companions |
4तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥
English explanation
Tulsidas says: After worshipping Bhavani repeatedly, Sita set off toward her residence with a joyful heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| भवानिहि | भवानी अर्थात देवी पार्वती को | Bhavani, the goddess Parvati |
| पूजि | पूजा करके | having worshipped |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर; बार-बार | again; repeatedly |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मन | मन से | in heart |
| मंदिर | निवास; राजमहल की ओर | toward her residence; palace |
| चली | चलीं; सीता रवाना हुईं | she set off; Sita departed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.236
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 231
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 230, 231
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।