बालकाण्ड · छंद · छंद
मंगल करनि कलिमल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की।
मूल पाठ
मंगल करनि कलिमल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की।
गति कूर कबिता सरित की ज्यों सरित पावन पाथ की॥
प्रभु सुजस संगति भनिति भलि होइहि सुजन मन भावनी।
भव अंग भूति मसान की सुमिरत सुहावनि पावनी॥
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 30, 31
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरघुनाथजीकी कथा कल्याण करनेवाली और कलियुगके पापोंको हरनेवाली है। मेरी इस भद्दी कवितारूपी नदीकी चाल पवित्र जलवाली नदी (गङ्गाजी) की चालकी भाँति टेढ़ी है। प्रभु श्रीरघुनाथजीके सुन्दर यशके संगसे यह कविता सुन्दर तथा सज्जनोंके मनको भानेवाली हो जायगी। श्मशानकी अपवित्र राख भी श्रीमहादेवजीके अंगके संगसे सुहावनी लगती है और स्मरण करते ही पवित्र करनेवाली होती है।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 31 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1मंगल करनि कलिमल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की।
English explanation
AI-draft interpretation: Tulsi says that the story of Lord Rama brings auspiciousness and removes the sins of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | मंगल; कल्याण | auspiciousness; well-being |
| करनि | करने वाली | bringing about |
| कलिमल | कलियुग के पाप और कलुष | the sins and impurities of the age of Kali |
| हरनि | हरने वाली | removing |
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| कथा | कथा | story |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Lord Rama, lord of Raghu’s lineage |
| की | की; से संबंधित | of; belonging to |
2गति कूर कबिता सरित की ज्यों सरित पावन पाथ की॥
English explanation
The course of my poetry-stream is winding, just as the course of a river with purifying water can be winding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गति | गति; प्रवाह का मार्ग | course; manner of flowing |
| कूर | टेढ़ी; वक्र | crooked; winding |
| कबिता | कविता | poetry |
| सरित | नदी; यहाँ कविता-रूपी नदी | river; here, the stream of poetry |
| की | की | of |
| ज्यों | जैसे | just as |
| सरित | नदी | river |
| पावन | पवित्र; शुद्ध करने वाला | holy; purifying |
| पाथ | जल | water |
| की | की; वाली | of; having |
3प्रभु सुजस संगति भनिति भलि होइहि सुजन मन भावनी।
English explanation
Through association with the Lord’s noble glory, this poetry will become good and pleasing to the hearts of virtuous people.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| सुजस | उत्तम यश; सुंदर कीर्ति | noble fame; glorious renown |
| संगति | संग से; संबंध के कारण | through association with |
| भनिति | काव्य-रचना; कविता | poetic composition |
| भलि | अच्छी; उत्तम | good; worthy |
| होइहि | होगी | will become |
| सुजन | सज्जनों के | of virtuous people |
| मन | मन को | to the heart |
| भावनी | प्रिय लगने वाली | pleasing; delightful |
4भव अंग भूति मसान की सुमिरत सुहावनि पावनी॥
English explanation
Likewise, even cremation-ground ash upon Shiva’s body is beautiful and purifying when remembered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | शिव | Shiva |
| अंग | अंगों पर; शरीर पर | upon the limbs; on the body |
| भूति | भस्म; राख | ash |
| मसान | श्मशान | cremation ground |
| की | की | of; from |
| सुमिरत | स्मरण करने पर | when remembered |
| सुहावनि | सुंदर; मनोहर | beautiful; pleasing |
| पावनी | पवित्र करने वाली | purifying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 31
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 30, 31
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।