बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।
मूल पाठ
धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।
भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी। राम कथा जग मंगल करनी।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 30, 31
भावार्थ
मूल पाठ के बादधुआँ भी अगरके संगसे सुगन्धित होकर अपने स्वाभाविक कड़ुवेपनको छोड़ देता है। मेरी कविता अवश्य भद्दी है, परन्तु इसमें जगत्का कल्याण करनेवाली रामकथारूपी उत्तम वस्तुका वर्णन किया गया है। [इससे यह भी अच्छी ही समझी जायगी]॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 31 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।
English explanation
Even smoke gives up its natural acridity through contact with agarwood and becomes fragrant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धूमउ | धुआँ भी | even smoke |
| तजइ | त्याग देता है | gives up |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| करुआई | कड़वाहट, तीखापन | acridity, pungency |
| अगरु | अगरु, सुगंधित लकड़ी | agarwood, fragrant wood |
| प्रसंग | के संपर्क से | through association with |
| सुगंध | सुगंध से | with fragrance |
| बसाई | सुवासित हो जाता है | becomes perfumed |
2 भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी। राम कथा जग मंगल करनी।।
English explanation
Though the poetic expression is rustic, it describes a worthy subject: Rama’s story, which brings welfare to the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भनिति | काव्यभाषा, रचना | poetic expression, composition |
| भदेस | अनगढ़, देहाती | rustic, unpolished |
| बस्तु | विषय-वस्तु | subject matter |
| भलि | अच्छी, उत्तम | good, worthy |
| बरनी | वर्णित की गई है | has been described |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| जग | संसार का | of the world |
| मंगल | मंगल, कल्याण | welfare, auspiciousness |
| करनी | करने वाली | bringing about |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 31
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 30, 31
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।