बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि मेरी इस रचनामें कविताका एक भी रस नहीं है, तथापि इसमें श्रीरामजीका प्रताप प्रकट है। मेरे मनमें यही एक भरोसा है। भले संगसे भला, किसने बड़प्पन नहीं पाया?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 31 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।
सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 30, 31
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।
English explanation
Although this poem contains not even one poetic rasa, Rama’s glory is manifest in it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| कबित | कविता में | in the poem |
| रस | काव्यरस | poetic rasa, aesthetic sentiment |
| एकउ | एक भी | even one |
| नाही | नहीं है | is not present |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| प्रताप | महिमा, प्रभाव | glory, power |
| प्रकट | प्रकट है | is manifest |
| एहि | इस रचना के | this composition |
| माहीं | भीतर, में | within, in |
2 सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा।।
English explanation
This very assurance has arisen in my mind. Who has not gained distinction through good company?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही, यही | that very |
| भरोस | भरोसा, आश्वासन | confidence, assurance |
| मोरें | मेरे | my |
| मन | मन में | in the mind |
| आवा | आया, उत्पन्न हुआ | arose |
| केहिं | किसने | who |
| न | नहीं | not |
| सुसंग | अच्छी संगति से | through good company |
| बडप्पनु | बड़प्पन, प्रतिष्ठा | greatness, distinction |
| पावा | पाया | gained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 31
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 30, 31
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।