बालकाण्ड · छंद · छंद
परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।
मूल पाठ
परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।
देखत रघुनायक जन सुख दायक सनमुख होइ कर जोरि रही।।
अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।
अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही।।
स्रोत अभिलेख 1.211 · पुस्तक पृ. 209, 210
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके पवित्र और शोकको नाश करनेवाले चरणोंका स्पर्श पाते ही सचमुच वह तपोमूॢत अहल्या प्रकट हो गयी। भक्तोंको सुख देनेवाले श्रीरघुनाथजीको देखकर वह हाथ जोड़कर सामने खड़ी रह गयी। अत्यन्त प्रेमके कारण वह अधीर हो गयी। उसका शरीर पुलकित हो उठा; मुखसे वचन कहनेमें नहीं आते थे। वह अत्यन्त बड़भागिनी अहल्या प्रभुके चरणोंसे लिपट गयी और उसके दोनों नेत्रोंसे जल (प्रेम और आनन्दके आँसुओं) की धारा बहने लगी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 209 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।
English explanation
AI draft: At the touch of the holy feet that dispel sorrow, Ahalya appeared, a true embodiment of austerity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसत | स्पर्श होते ही | upon touching |
| पद | राम के चरण | Rama’s feet |
| पावन | पवित्र करने वाले | purifying |
| सोक | शोक | sorrow |
| नसावन | मिटाने वाले | dispelling |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| भई | हो गईं | became |
| तपपुंज | तपस्या की राशि | embodiment of austerity |
| सही | साक्षात्; वास्तव में | truly; indeed |
2 देखत रघुनायक जन सुख दायक सनमुख होइ कर जोरि रही।।
English explanation
Seeing Rama, leader of the Raghu lineage and giver of joy to devotees, she stood before him with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखकर | on seeing |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम | Rama, leader of the Raghu lineage |
| जन | भक्तों को | to devotees |
| सुख | सुख | joy |
| दायक | देने वाले | giving |
| सनमुख | सामने | before him |
| होइ | होकर | having come |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | folding |
| रही | खड़ी रहीं | remained standing |
3 अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।
English explanation
Overwhelmed by intense love, her body thrilled, and she could utter no words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यधिक | intense |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| अधीरा | व्याकुल | overwhelmed |
| पुलक | रोमांचित | thrilling with goosebumps |
| सरीरा | शरीर | body |
| मुख | मुख से | from her mouth |
| नहिं | नहीं | not |
| आवइ | आता था; निकलता था | came forth |
| बचन | वचन | words |
| कही | कहने में | to utter |
4 अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही।।
English explanation
Most fortunate, she bowed at his feet, and streams of tears flowed from both eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतिसय | अत्यंत | exceedingly |
| बड़भागी | सौभाग्यवती | fortunate woman |
| चरनन्हि | चरणों में | at his feet |
| लागी | लग गईं; झुक गईं | bowed down |
| जुगल | दोनों | both |
| नयन | नेत्रों से | from her eyes |
| जलधार | आँसुओं की धारा | stream of tears |
| बही | बही | flowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.211
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 209
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 209, 210
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।