बालकाण्ड · छंद · छंद
धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।
मूल पाठ
धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।
अति निर्मल बानीं अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई।।
मै नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।
राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई।।
स्रोत अभिलेख 1.211 · पुस्तक पृ. 209, 210
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर उसने मनमें धीरज धरकर प्रभुको पहचाना और श्रीरघुनाथजीकी कृपासे भक्ति प्राप्त की। तब अत्यन्त निर्मल वाणीसे उसने [इस प्रकार] स्तुति प्रारम्भ की—हे ज्ञानसे जानने योग्य श्रीरघुनाथजी! आपकी जय हो! मैं [सहज ही] अपवित्र स्त्री हूँ; और हे प्रभो! आप जगत्को पवित्र करनेवाले, भक्तोंको सुख देनेवाले और रावणके शत्रु हैं। हे कमलनयन! हे संसार (जन्म-मृत्यु) के भयसे छुड़ानेवाले! मैं आपकी शरण आयी हूँ, [मेरी] रक्षा कीजिये, रक्षा कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 209 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।
English explanation
She steadied her mind, recognized the Lord, and received devotion through Rama’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धीरजु | धैर्य | composure |
| मन | मन में | in her mind |
| कीन्हा | धारण किया | established |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कहुँ | को | object marker |
| चीन्हा | पहचाना | recognized |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| भगति | भक्ति | devotion |
| पाई | प्राप्त की | obtained |
2 अति निर्मल बानीं अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई।।
English explanation
With exceedingly pure speech she began her praise: ‘Glory to you, Rama, king of the Raghu lineage, who can be known through spiritual knowledge!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| निर्मल | शुद्ध | pure |
| बानीं | वाणी से | with speech |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| ठानी | आरंभ की | began |
| ग्यानगम्य | ज्ञान द्वारा जानने योग्य | knowable through spiritual knowledge |
| जय | जय हो | glory to you |
| रघुराई | हे रघुकुल के राजा राम | O Rama, king of the Raghu lineage |
3 मै नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।
English explanation
I am an impure woman; Lord, you purify the world, are Ravana’s enemy, and bring joy to devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मै | मैं | I |
| नारि | स्त्री | woman |
| अपावन | अपवित्र | impure |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| जग | संसार को | the world |
| पावन | पवित्र करने वाले | purifying |
| रावन | रावण के | of Ravana |
| रिपु | शत्रु | enemy |
| जन | भक्तों को | to devotees |
| सुखदाई | सुख देने वाले | giver of joy |
4 राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई।।
English explanation
O lotus-eyed Lord, deliverer from the fear of worldly existence, protect me, protect me! I have come to your refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजीव | कमल | lotus |
| बिलोचन | नेत्रों वाले | eyed |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| भय | भय | fear |
| मोचन | मुक्त करने वाले | deliverer from |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| सरनहिं | आपकी शरण में | to your refuge |
| आई | आई हूँ | I have come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.211
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 209
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 209, 210
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।