बालकाण्ड · छंद · छंद
मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।
मूल पाठ
मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।
देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना।।
बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।
पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना।।
स्रोत अभिलेख 1.211 · पुस्तक पृ. 209, 210
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिने जो मुझे शाप दिया, सो बहुत ही अच्छा किया। मैं उसे अत्यन्त अनुग्रह मानती हूँ कि जिसके कारण मैंने संसारसे छुड़ानेवाले श्रीहरि (आप) को नेत्र भरकर देखा। इसी (आपके दर्शन) को शंकरजी सबसे बड़ा लाभ समझते हैं। हे प्रभो! मैं बुद्धिकी बड़ी भोली हूँ, मेरी एक विनती है। हे नाथ! मैं और कोई वर नहीं माँगती, केवल यही चाहती हूँ कि मेरा मनरूपी भौंरा आपके चरणकमलकी रजके प्रेमरूपी रसका सदा पान करता रहे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 209 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।
English explanation
The curse the sage gave did me great good; I regarded it as the highest favor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | गौतम मुनि ने | sage Gautama |
| श्राप | शाप | curse |
| जो | जो | which |
| दीन्हा | दिया | gave |
| अति | बहुत | greatly |
| भल | भला | good |
| कीन्हा | किया | did |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| अनुग्रह | कृपा; उपकार | favor; kindness |
| मैं | मैंने | I |
| माना | माना | regarded it as |
2 देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना।।
English explanation
I beheld Hari, deliverer from worldly bondage, to my eyes’ content; Shiva knows this to be the true gain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखेउँ | मैंने देखा | I beheld |
| भरि | भरकर; तृप्ति तक | to fullness; to contentment |
| लोचन | आँखें | eyes |
| हरि | हरि, यहाँ राम | Hari, here Rama |
| भवमोचन | संसार-बंधन से मुक्त करने वाले | deliverer from worldly bondage |
| इहइ | यही | this very thing |
| लाभ | लाभ | gain |
| संकर | शंकर, शिव | Shiva |
| जाना | जानते हैं | knows |
3 बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।
English explanation
Lord, this is my plea: I am simple of understanding; Master, I ask for no other boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनती | विनती | plea |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| मोरी | मेरी | my |
| मैं | मैं | I |
| मति | बुद्धि | understanding |
| भोरी | भोली; सरल | simple; naive |
| नाथ | हे स्वामी | O Master |
| न | नहीं | not |
| मागउँ | मैं माँगती हूँ | I ask |
| बर | वरदान | boon |
| आना | अन्य | other |
4 पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना।।
English explanation
May my mind, like a bee, lovingly drink the nectar of the pollen of your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पद | आपके चरण | your feet |
| कमल | कमल-रूपी | lotus-like |
| परागा | पराग का | of the pollen |
| रस | रस | nectar |
| अनुरागा | प्रेमपूर्वक | with loving attachment |
| मम | मेरा | my |
| मन | मन | mind |
| मधुप | भँवरा | bee |
| करै | करे; करता रहे | may perform; continue |
| पाना | पान | drinking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.211
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 209
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 209, 210
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।