बालकाण्ड · छंद · छंद
जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिन चरणोंसे परमपवित्र देवनदी गङ्गाजी प्रकट हुईं, जिन्हें शिवजीने सिरपर धारण किया और जिन चरणकमलोंको ब्रह्माजी पूजते हैं, कृपालु हरि (आप) ने उन्हीेंको मेरे सिरपर रखा। इस प्रकार [स्तुति करती हुई] बार-बार भगवान्के चरणोंमें गिरकर, जो मनको बहुत ही अच्छा लगा, उस वरको पाकर गौतमकी स्त्री अहल्या आनन्दमें भरी हुई पतिलोकको चली गयी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 210 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।
सोइ पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।।
एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।
जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पतिलोक अनंद भरी।।
स्रोत अभिलेख 1.211 · पुस्तक पृ. 209, 210
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।
English explanation
From those feet arose the supremely holy Ganga, whom Shiva bore upon his head—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिनसे | from which |
| पद | चरण | feet |
| सुरसरिता | देवनदी गंगा | Ganga, the divine river |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पुनीता | पवित्र | holy |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| भई | हुईं | became |
| सिव | शिव ने | Shiva |
| सीस | सिर पर | upon his head |
| धरी | धारण किया | bore |
2 सोइ पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।।
English explanation
Those very lotus feet, which Brahma worships, the compassionate Hari placed upon my head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | those very |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल-रूपी | lotus-like |
| जेहि | जिन्हें | which |
| पूजत | पूजते हैं | worships |
| अज | ब्रह्मा, अजन्मा सृष्टिकर्ता | Brahma, the unborn creator |
| मम | मेरे | my |
| सिर | सिर पर | upon the head |
| धरेउ | रखा | placed |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| हरी | हरि, यहाँ राम ने | Hari, here Rama |
3 एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।
English explanation
Thus Ahalya, Gautama’s wife, departed after repeatedly bowing at Hari’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| भाँति | प्रकार | manner |
| सिधारी | विदा हुईं | departed |
| गौतम | गौतम ऋषि की | of sage Gautama |
| नारी | पत्नी अहल्या | wife, Ahalya |
| बार | बार | time |
| बार | बार; पुनः | after time; again |
| हरि | हरि, यहाँ राम के | of Hari, here Rama |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| परी | गिरीं; प्रणाम किया | fell in reverence; bowed |
4 जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पतिलोक अनंद भरी।।
English explanation
She received the very boon most dear to her heart and, filled with joy, went to her husband’s abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| अति | अत्यंत | greatly |
| मन | मन को | to her heart |
| भावा | प्रिय लगा | was pleasing |
| सो | वही | that very |
| बरु | वरदान | boon |
| पावा | प्राप्त किया | received |
| गै | गईं | went |
| पतिलोक | पति के लोक; निवास को | to her husband’s realm or abode |
| अनंद | आनंद से | with joy |
| भरी | भरी हुई | filled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.211
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 210
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 209, 210
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।