बालकाण्ड · छंद · छंद
निज पानि मनि महुँ देखिअति मूरति सुरूपनिधान की।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअपने हाथकी मणियोंमें सुन्दर रूपके भण्डार श्रीरामचन्द्रजीकी परछाहीं दीख रही है। यह देखकर जानकीजी दर्शनमें वियोग होनेके भयसे बाहुरूपी लताको और दृष्टिको हिलाती-डुलाती नहीं हैं। उस समयके हँसी-खेल और विनोदका आनन्द और प्रेम कहा नहीं जा सकता, उसे सखियाँ ही जानती हैं। तदनन्तर वर-कन्याओंको सब सुन्दर सखियाँ जनवासेको लिवा चलीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 313 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज पानि मनि महुँ देखिअति मूरति सुरूपनिधान की।
चालति न भुजबल्ली बिलोकनि बिरह भय बस जानकी॥
कौतुक बिनोद प्रमोदु प्रेमु न जाइ कहि जानहिं अलीं।
बर कुअँरि सुंदर सकल सखीं लवाइ जनवासेहि चलीं॥
स्रोत अभिलेख 1.327 · पुस्तक पृ. 311, 312
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1निज पानि मनि महुँ देखिअति मूरति सुरूपनिधान की।
English explanation
In the jewel on her own hand, Sita sees the reflected form of Rama, the treasury of beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | her own |
| पानि | हाथ की | on her hand |
| मनि | मणि | jewel |
| महुँ | में | in |
| देखिअति | दिखाई देती है | is visible |
| मूरति | छवि | reflected form |
| सुरूपनिधान | सुंदरता के भंडार राम | Rama, the treasury of beauty |
| की | की | of |
2चालति न भुजबल्ली बिलोकनि बिरह भय बस जानकी॥
English explanation
Afraid of losing that sight, Janaki does not move her vine-like arm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चालति | हिलाती हैं | moves |
| न | नहीं | not |
| भुजबल्ली | लता-जैसी बाँह | vine-like arm |
| बिलोकनि | उस दर्शन से | from that sight |
| बिरह | वियोग | separation |
| भय | भय | fear |
| बस | के वश में | under the sway of |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Janaki, Janaka's daughter Sita |
3कौतुक बिनोद प्रमोदु प्रेमु न जाइ कहि जानहिं अलीं।
English explanation
Those charming festivities, playful pleasures, joy, and love cannot be described; the companions know them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुक | मनोरम कौतुक | delightful festivities |
| बिनोद | हँसी-खेल | playful amusement |
| प्रमोदु | हर्ष | joy |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| कहि | कहा | described |
| जानहिं | जानती हैं | know |
| अलीं | सखियाँ | female companions |
4बर कुअँरि सुंदर सकल सखीं लवाइ जनवासेहि चलीं॥
English explanation
All the companions set out for the groom's party's lodging, taking the handsome bridegrooms and beautiful princesses along.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बर | वरों को | the bridegrooms |
| कुअँरि | कुमारियों को | the princesses |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सकल | सभी | all |
| सखीं | सखियाँ | female companions |
| लवाइ | साथ लेकर | taking along |
| जनवासेहि | जनवासे की ओर | to the groom's party's lodging |
| चलीं | चलीं | set out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.327
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 313
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 311, 312
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।