बालकाण्ड · छंद · छंद
निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसीं कह्यो।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअपनी वाणीको पवित्र करनेके लिये तुलसीने रामका यश कहा है। [नहीं तो] श्रीरघुनाथजीका चरित्र अपार समुद्र है, किस कविने उसका पार पाया है ? जो लोग यज्ञोपवीत और विवाहके मङ्गलमय उत्सवका वर्णन आदरके साथ सुनकर गावेंगे, वे लोग श्रीजानकीजी और श्रीरामजीकी कृपासे सदा सुख पावेंगे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 341 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसीं कह्यो।
रघुबीर चरित अपार बारिधि पारु कबि कौनें लह्यो॥
उपबीत ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं।
बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्बदा सुखु पावहीं॥
स्रोत अभिलेख 1.361 · पुस्तक पृ. 340, 341
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसीं कह्यो।
English explanation
Tulsi has recounted Rama’s glory to purify his own speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | his own |
| गिरा | वाणी | speech |
| पावनि | पवित्र | pure |
| करन | करने | to make |
| कारन | के लिए | for the purpose of |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| जसु | यश | glory |
| तुलसीं | कवि तुलसीदास ने | the poet Tulsidas |
| कह्यो | कहा; वर्णन किया | recounted |
2रघुबीर चरित अपार बारिधि पारु कबि कौनें लह्यो॥
English explanation
Rama’s deeds are a boundless ocean; what poet has ever reached its farther shore?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम का | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| चरित | चरित्र; जीवन और कर्मों का वृत्तांत | account of his life and deeds |
| अपार | असीम | boundless |
| बारिधि | समुद्र | ocean |
| पारु | पार; दूसरा छोर | farther shore; limit |
| कबि | कवि | poet |
| कौनें | किसने | which one has |
| लह्यो | पाया | reached |
3उपबीत ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं।
English explanation
Those who listen to the auspicious accounts of the sacred-thread and wedding celebrations and sing them reverently—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपबीत | यज्ञोपवीत संस्कार | sacred-thread ceremony |
| ब्याह | विवाह | wedding |
| उछाह | उत्सव; उल्लास | festivities; rejoicing |
| मंगल | मंगलमय वर्णन या गीत | auspicious accounts or songs |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| जे | जो लोग | those who |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| गावहीं | गाते हैं | sing |
4बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्बदा सुखु पावहीं॥
English explanation
Those people always find happiness through the grace of Sita and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैदेहि | विदेह की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| प्रसाद | कृपा | grace |
| ते | से | through |
| जन | वे लोग | those people |
| सर्बदा | सदैव | always |
| सुखु | सुख | happiness |
| पावहीं | पाते हैं | obtain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.361
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 341
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द · श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 340, 341
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।