बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।
मूल पाठ
कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।
तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.361 · पुस्तक पृ. 340, 341
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीसीतारामजीके यशको कविकुलके जीवनको पवित्र करनेवाला और मङ्गलोंकी खान जानकर, इससे मैंने अपनी वाणीको पवित्र करनेके लिये कुछ (थोड़ा-सा) बखानकर कहा है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 341 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।
English explanation
Knowing Rama and Sita’s glory to be the lifeblood of poets, purifying, and a treasure of auspiciousness—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबिकुल | कवियों के समुदाय का | of the community of poets |
| जीवनु | जीवन; जीवनाधार | life; lifeblood |
| पावन | पवित्र करने वाला | purifying |
| जानी | जानकर | knowing; recognizing |
| राम | राम का | of Rama |
| सीय | सीता का | of Sita |
| जसु | यश | glory; renown |
| मंगल | मंगल की | of auspiciousness |
| खानी | खान; भंडार | mine; treasury |
2 तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी।।
English explanation
For that reason, I have recounted a little of it to purify my own speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी कारण | that reason |
| ते | से | because of |
| मैं | मैंने | I |
| कछु | कुछ; थोड़ा | a little |
| कहा | कहा | told |
| बखानी | वर्णन करके | by recounting |
| करन | करने के | to make |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| हेतु | लिए | for the purpose of |
| निज | अपनी | my own |
| बानी | वाणी | speech; expression |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.361
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 341
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द · श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 340, 341
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।