बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।
मूल पाठ
आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।
प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू। सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.361 · पुस्तक पृ. 340, 341
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे श्रीरामचन्द्रजी विवाह करके घर आये, तबसे सब प्रकारका आनन्द अयोध्यामें आकर बसने लगा। प्रभुके विवाहमें जैसा आनन्द-उत्साह हुआ, उसे सरस्वती और सर्पोंके राजा शेषजी भी नहीं कह सकते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 340 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।
English explanation
Ever since Rama came home after marrying, joy has dwelt throughout Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आए | आए | came |
| ब्याहि | विवाह करके | having married |
| रामु | राम | Rama |
| घर | घर | home |
| जब | जब | when |
| तें | से | since |
| बसइ | बसता है | dwells |
| अनंद | आनंद | joy |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| सब | समूची | all; throughout |
| तब | तब | then |
| तें | से | since |
2 प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू। सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू।।
English explanation
Even Sarasvati and Shesha, the serpent king, cannot describe the jubilation that arose at Lord Rama’s wedding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बिबाहँ | विवाह में | at the wedding |
| जस | जैसा | such as; the kind that |
| भयउ | हुआ | arose; occurred |
| उछाहू | उल्लास | jubilation |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| न | नहीं | not |
| बरनि | वर्णन कर | describe |
| गिरा | वाणी की देवी सरस्वती | Sarasvati, goddess of speech |
| अहिनाहू | सर्पों के स्वामी शेष | Shesha, lord of serpents |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.361
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 340
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द · श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 340, 341
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।