बालकाण्ड · छंद · छंद
गारीं मधुर स्वर देहिं सुंदरि बिंग्य बचन सुनावहीं।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब सुन्दरी स्त्रियाँ मीठे स्वरमें गालियाँ देने लगीं और व्यंग्यभरे वचन सुनाने लगीं। देवगण विनोद सुनकर बहुत सुख अनुभव करते हैं, इसलिये भोजन करनेमें बड़ी देर लगा रहे हैं। भोजनके समय जो आनन्द बढ़ा, वह करोड़ों मुँहसे भी नहीं कहा जा सकता। [भोजन कर चुकनेपर] सबके हाथ-मुँह धुलवाकर पान दिये गये। फिर सब लोग, जो जहाँ ठहरे थे, वहाँ चले गये।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 113 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गारीं मधुर स्वर देहिं सुंदरि बिंग्य बचन सुनावहीं।
भोजनु करहिं सुर अति बिलंबु बिनोदु सुनि सचु पावहीं॥
जेवँत जो बढ़्यो अनंदु सो मुख कोटिहूँ न परै कह्यो।
अचवाँइ दीन्हे पान गवने बास जहँ जाको रह्यो॥
स्रोत अभिलेख 1.99 · पुस्तक पृ. 113, 113
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1गारीं मधुर स्वर देहिं सुंदरि बिंग्य बचन सुनावहीं।
English explanation
AI draft: The beautiful women sing playful wedding taunts in sweet voices and offer teasing remarks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गारीं | विवाह की हँसी-ठिठोली वाली गारियाँ | playful wedding taunts |
| मधुर | मीठे | sweet |
| स्वर | स्वर में | in voices |
| देहिं | देती हैं | give |
| सुंदरि | सुंदर स्त्रियाँ | beautiful women |
| बिंग्य | व्यंग्यपूर्ण; छेड़छाड़ भरे | teasing; playfully pointed |
| बचन | वचन | remarks |
| सुनावहीं | सुनाती हैं | make them hear |
2भोजनु करहिं सुर अति बिलंबु बिनोदु सुनि सचु पावहीं॥
English explanation
The gods linger over their meal and enjoy hearing the merriment—the final sense assumes a likely textual error in the supplied ‘सचु’.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोजनु | भोजन | a meal |
| करहिं | करते हैं | eat |
| सुर | देवता | the gods |
| अति | बहुत | very much |
| बिलंबु | देर; विलंब | delay; lingering |
| बिनोदु | हँसी-ठिठोली | playful merriment |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| सचु | संभवतः सुख | probably pleasure |
| पावहीं | पाते हैं | obtain; experience |
3जेवँत जो बढ़्यो अनंदु सो मुख कोटिहूँ न परै कह्यो।
English explanation
The joy that grew as they ate could not be expressed even by millions of mouths.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेवँत | भोजन करते समय | while eating |
| जो | जो | which |
| बढ़्यो | बढ़ा | grew |
| अनंदु | आनंद | joy |
| सो | वह | that |
| मुख | मुखों से | by mouths |
| कोटिहूँ | करोड़ों से भी | even by millions |
| न | नहीं | not |
| परै | हो सकता; संभव होता | can be; is possible |
| कह्यो | कहा जाना | expressed |
4अचवाँइ दीन्हे पान गवने बास जहँ जाको रह्यो॥
English explanation
After they were helped to rinse their mouths, betel was offered; then each departed to their allotted lodging.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अचवाँइ | कुल्ला-आचमन कराकर | having them rinse their mouths |
| दीन्हे | दिए गए | were given |
| पान | खाने के पान | betel preparations |
| गवने | चले गए | departed |
| बास | ठहरने का स्थान | lodging |
| जहँ | जहाँ | where |
| जाको | जिसका | each one's; whose |
| रह्यो | था; नियत था | was situated; was allotted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 113
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 113, 113
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।