बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।
मूल पाठ
बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।
नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.99 · पुस्तक पृ. 113, 113
भावार्थ
मूल पाठ के बादभोजन [करनेवालों] की बहुत-सी पङ्गतें बैठीं। चतुर रसोइये परोसने लगे। स्त्रियोंकी मण्डलियाँ देवताओंको भोजन करते जानकर कोमल वाणीसे गालियाँ देने लगीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 113 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।
English explanation
The diners sat in various rows, and skilled cooks began serving.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिधि | विविध | various |
| पाँति | भोजन की पंक्तियों में | in dining rows |
| बैठी | बैठे | sat |
| जेवनारा | भोजन करने वाले | diners |
| लागे | लगे | began |
| परुसन | परोसने | serving food |
| निपुन | कुशल | skilled |
| सुआरा | रसोइये | cooks |
2 नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।
English explanation
Knowing that the gods were dining, the women began offering playful wedding taunts in gentle voices.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारिबृंद | स्त्रियों का समूह | the group of women |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| जेवँत | भोजन करते हुए | eating |
| जानी | जानकर | knowing |
| लगीं | लगीं | began |
| देन | देने | to offer |
| गारीं | विवाह की विनोदपूर्ण गालियाँ | playful wedding taunts |
| मृदु | कोमल, मधुर | gentle and sweet |
| बानी | वाणी में | in their voices |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 113
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 113, 113
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।