बालकाण्ड · छंद · छंद
कोटिहुँ बदन नहिं बनै बरनत जग जननि सोभा महा।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजगज्जननी पार्वतीजीकी महान् शोभाका वर्णन करोड़ों मुखोंसे भी करते नहीं बनता। वेद, शेषजी और सरस्वतीजीतक उसे कहते हुए सकुचा जाते हैं, तब मन्दबुद्धि तुलसी किस गिनतीमें है। सुन्दरता और शोभाकी खान माता भवानी मण्डपके बीचमें, जहाँ शिवजी थे, वहाँ गयीं। वे संकोचके मारे पति (शिवजी) के चरणकमलोंको देख नहीं सकतीं, परन्तु उनका मनरूपी भौंरा तो वहीं [रस-पान कर रहा] था।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 114 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कोटिहुँ बदन नहिं बनै बरनत जग जननि सोभा महा।
सकुचहिं कहत श्रुति सेष सारद मंदमति तुलसी कहा॥
छबिखानि मातु भवानि गवनीं मध्य मंडप सिव जहाँ।
अवलोकि सकहिं न सकुच पति पद कमल मनु मधुकरु तहाँ॥
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 114, 114
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1कोटिहुँ बदन नहिं बनै बरनत जग जननि सोभा महा।
English explanation
AI draft: Even millions of mouths cannot describe the great beauty of the Mother of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटिहुँ | करोड़ों से भी | even with millions |
| बदन | मुख | mouths |
| नहिं | नहीं | not |
| बनै | हो सकता है | is possible |
| बरनत | वर्णन करते हुए | in describing |
| जग | जगत की | of the world |
| जननि | माता | Mother |
| सोभा | शोभा; सुंदरता | beauty; splendor |
| महा | महान | great |
2सकुचहिं कहत श्रुति सेष सारद मंदमति तुलसी कहा॥
English explanation
Even the Vedas, Shesha, and Saraswati hesitate to describe her; what, then, can dull-witted Tulsidas do?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुचहिं | संकोच करते हैं | hesitate |
| कहत | कहते समय; वर्णन करते हुए | while speaking; describing |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| सेष | शेषनाग | Shesha, the divine serpent |
| सारद | सरस्वती, वाणी की देवी | Saraswati, goddess of speech |
| मंदमति | अल्पबुद्धि | of limited understanding |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| कहा | क्या बिसात; कहाँ ठहरते हैं | what standing does he have? |
3छबिखानि मातु भवानि गवनीं मध्य मंडप सिव जहाँ।
English explanation
Mother Bhavani, a treasury of beauty, went into the middle of the pavilion, where Shiva was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छबिखानि | सुंदरता की खान | a treasury of beauty |
| मातु | माता | Mother |
| भवानि | भवानी; पार्वती | Bhavani, Parvati |
| गवनीं | गईं | went |
| मध्य | बीच में | in the middle |
| मंडप | विवाह-मंडप के | of the wedding pavilion |
| सिव | शिव | Shiva |
| जहाँ | जहाँ थे | where he was |
4अवलोकि सकहिं न सकुच पति पद कमल मनु मधुकरु तहाँ॥
English explanation
Out of modesty she cannot look at her husband, but her mind, like a bee, rests there upon his lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवलोकि | देख | look at |
| सकहिं | सकती हैं | can |
| न | नहीं | not |
| सकुच | संकोच के कारण | because of modesty |
| पति | पति के | of her husband |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| मनु | मन | her mind |
| मधुकरु | भौंरा | a bee |
| तहाँ | वहीं, चरण-कमलों पर | there, at his lotus feet |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 114
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 114, 114
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।