बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।
मूल पाठ
जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।
सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 114, 114
भावार्थ
मूल पाठ के बादपार्वतीजीको जगदम्बा और शिवजीकी पत्नी समझकर देवताओंने मन-ही-मन प्रणाम किया। भवानीजी सुन्दरताकी सीमा हैं। करोड़ों मुखोंसे भी उनकी शोभा नहीं कही जा सकती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 114 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।
English explanation
Recognizing Shiva’s consort as the Mother of the universe, the gods bowed to her inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगदंबिका | जगत की माता | Mother of the universe |
| जानि | जानकर | recognizing as |
| भव | शिव की | of Shiva |
| भामा | पत्नी | consort |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| मनहिं | मन ही में | inwardly |
| मन | मन में | in their minds |
| कीन्ह | किया | offered |
| प्रनामा | प्रणाम | obeisance |
2 सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।
English explanation
Bhavani is the ultimate expression of beauty; even millions of mouths cannot describe her beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदरता | सुंदरता की | of beauty |
| मरजाद | परम सीमा | ultimate limit |
| भवानी | भवानी, शिव की पत्नी पार्वती | Bhavani, Parvati the consort of Shiva |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| न | नहीं | not |
| कोटिहुँ | करोड़ों से भी | even with millions |
| बदन | मुखों से | mouths |
| बखानी | वर्णन | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 114
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 114, 114
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।