बालकाण्ड · छंद · छंद
कुल रीति प्रीति समेत रबि कहि देत सबु सादर कियो।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दस्वयं सूर्यदेव प्रेमसहित अपने कुलकी सब रीतियाँ बता देते हैं और वे सब आदरपूर्वक की जा रही हैं। इस प्रकार देवताओंकी पूजा कराके मुनियोंने सीताजीको सुंदर सिं हासन दिया। श्रीसीताजी और श्रीरामजीका आपसमें एक-दूसरेको देखना तथा उनका परस्परका प्रेम किसीको लख नहीं पड़ रहा है। जो बात श्रेष्ठ मन, बुद्धि और वाणीसे भी परे है, उसे कवि क्योंकर प्रकट करे?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 305 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कुल रीति प्रीति समेत रबि कहि देत सबु सादर कियो।
एहि भाँति देव पुजाइ सीतहि सुभग सिं घासनु दियो॥
सिय राम अवलोकनि परसपर प्रेमु काहु न लखि परै।
मन बुद्धि बर बानी अगोचर प्रगट कबि कैसें करै॥
स्रोत अभिलेख 1.323 · पुस्तक पृ. 304, 304
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1कुल रीति प्रीति समेत रबि कहि देत सबु सादर कियो।
English explanation
The Sun god lovingly explains the family customs, and everything is carried out respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुल | वंश की | of the family lineage |
| रीति | परंपरागत रीति | traditional customs |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| समेत | के साथ | with |
| रबि | सूर्यदेव | the Sun god |
| कहि | कहकर | by explaining |
| देत | बताते जाते हैं | keep imparting |
| सबु | सब कुछ | everything |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| कियो | किया गया | was carried out |
2एहि भाँति देव पुजाइ सीतहि सुभग सिं घासनु दियो॥
English explanation
After having the deities worshipped in this way, a beautiful throne was given to Sita. This reading takes ‘सिं घासनु’ as a likely erroneous division of the word for throne.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| भाँति | प्रकार | way |
| देव | देवताओं की | the deities |
| पुजाइ | पूजा करवाकर | having had worship performed |
| सीतहि | सीता को | to Sita |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सिं | संयुक्त ‘सिंघासनु’ में: सिंहासन, सम्मानित आसन। | As part of ‘सिंघासनु’: throne or seat of honor. |
| घासनु | संयुक्त ‘सिंघासनु’ में: सिंहासन, सम्मानित आसन। | As part of ‘सिंघासनु’: throne or seat of honor. |
| दियो | दिया गया | was given |
3सिय राम अवलोकनि परसपर प्रेमु काहु न लखि परै।
English explanation
No one can discern the love in Sita and Rama’s gazing at one another.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता | Sita |
| राम | राम | Rama |
| अवलोकनि | देखने में | in the act of gazing |
| परसपर | एक-दूसरे को | at one another |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| काहु | किसी को | by anyone |
| न | नहीं | not |
| लखि | समझ में | discerned |
| परै | आता है | can be |
4मन बुद्धि बर बानी अगोचर प्रगट कबि कैसें करै॥
English explanation
How can a poet express that love, which lies beyond the reach of mind, intellect, and even the finest speech?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | mind |
| बुद्धि | बुद्धि | intellect |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बानी | वाणी | speech |
| अगोचर | की पहुँच से परे | beyond the reach of |
| प्रगट | व्यक्त | manifest |
| कबि | कवि | a poet |
| कैसें | कैसे | how |
| करै | करे | could make |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 305
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 304, 304
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।