बालकाण्ड · छंद · छंद
आचारु करि गुर गौरि गनपति मुदित बिप्र पुजावहीं।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकुलाचार करके गुरुजी प्रसन्न होकर गौरीजी, गणेशजी और ब्राह्मणोंकी पूजा करा रहे हैं [अथवा ब्राह्मणोंके द्वारा गौरी और गणेशकी पूजा करवा रहे हैं]। देवता प्रकट होकर पूजा ग्रहण करते हैं, आशीर्वाद देते हैं और अत्यन्त सुख पा रहे हैं। मधुपर्क आदि जिस किसी भी माङ्गलिक पदार्थकी मुनि जिस समय भी मनमें चाहमात्र करते हैं, सेवकगण उसी समय सोनेकी परातोंमें और कलशोंमें भरकर उन पदार्थोंको लिये तैयार रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 304 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आचारु करि गुर गौरि गनपति मुदित बिप्र पुजावहीं।
सुर प्रगटि पूजा लेहिं देहिं असीस अति सुखु पावहीं॥
मधुपर्क मंगल द्रब्य जो जेहि समय मुनि मन महुँ चहैं।
भरे कनक कोपर कलस सो तब लिएहिं परिचारक रहैं॥
स्रोत अभिलेख 1.323 · पुस्तक पृ. 304, 304
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1आचारु करि गुर गौरि गनपति मुदित बिप्र पुजावहीं।
English explanation
AI-draft interpretation: Following the prescribed observances, the joyful Brahmins conduct the worship of the guru, Gauri, and Ganesha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आचारु | विधिपूर्वक धार्मिक आचार | prescribed ritual observances |
| करि | करके | having performed |
| गुर | गुरु की | the guru |
| गौरि | गौरी अर्थात् पार्वती की | Gauri, the goddess Parvati |
| गनपति | गणपति अर्थात् गणेश की | Ganesha, lord of the divine hosts |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmin priests |
| पुजावहीं | पूजा करवाते हैं | have the worship performed |
2सुर प्रगटि पूजा लेहिं देहिं असीस अति सुखु पावहीं॥
English explanation
The deities appear, accept the worship, give blessings, and experience great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | the deities |
| प्रगटि | प्रकट होकर | having appeared |
| पूजा | पूजा | worship |
| लेहिं | स्वीकार करते हैं | accept |
| देहिं | देते हैं | give |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| अति | अत्यंत | great |
| सुखु | सुख | joy |
| पावहीं | पाते हैं | experience |
3मधुपर्क मंगल द्रब्य जो जेहि समय मुनि मन महुँ चहैं।
English explanation
Whatever the sages wish for at any particular moment—madhuparka or other auspicious ritual materials—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मधुपर्क | अतिथि-सत्कार का मधु-दधि आदि से बना मिश्रण | a ceremonial hospitality mixture of honey, curd, and other ingredients |
| मंगल | मंगलकारी | auspicious |
| द्रब्य | पूजा की सामग्री | ritual materials |
| जो | जो भी सामग्री | whatever material |
| जेहि | जिस | at whichever |
| समय | समय | time |
| मुनि | मुनि | the sages |
| मन | मन | their minds |
| महुँ | में | in |
| चहैं | चाहते हैं | desire |
4भरे कनक कोपर कलस सो तब लिएहिं परिचारक रहैं॥
English explanation
At that very moment, attendants stand ready with golden basins and pitchers filled with those materials.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरे | भरे हुए | filled |
| कनक | सोने के | golden |
| कोपर | बड़े कटोरे या परात जैसे पात्र | large bowl-like basins |
| कलस | कलश | ceremonial pitchers |
| सो | वही चाही हुई सामग्री | those very desired materials |
| तब | उसी समय | at that moment |
| लिएहिं | लिए हुए | holding |
| परिचारक | सेवक | attendants |
| रहैं | उपस्थित रहते हैं | stand ready |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 304
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 304, 304
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।