बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवताओंके समाजको देखकर सब मनमें प्रसन्न हुए और विष्णुभगवान्को देखकर तो बहुत ही सुखी हुए। किन्तु जब शिवजीके दलको देखने लगे तब तो उनके सब वाहन (सवारियोंके हाथी, घोड़े, रथके बैल आदि) डरकर भाग चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 109 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।
सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे।।
स्रोत अभिलेख 1.95 · पुस्तक पृ. 109, 109
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।
English explanation
Seeing the host of gods, they rejoiced in their hearts; seeing Vishnu, they became exceedingly happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| सुर | देवताओं की | of the gods |
| सेन | सेना, समूह | host or company |
| निहारी | देखकर | having beheld |
| हरिहि | भगवान विष्णु को | Vishnu |
| देखि | देखकर | seeing |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| भए | हो गए | became |
| सुखारी | प्रसन्न | happy |
2 सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे।।
English explanation
When they began looking at Shiva’s company, all the riding animals took fright and fled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | शिव का | Shiva’s |
| समाज | दल, साथ आया समूह | company or retinue |
| जब | जब | when |
| देखन | देखने | to look at |
| लागे | लगे | began |
| बिडरि | डरकर, बिदककर | taking fright |
| चले | चल पड़े | went off |
| बाहन | सवारी के पशु | riding animals |
| सब | सभी | all |
| भागे | भागे | fled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 109
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 109, 109
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।