बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।
मूल पाठ
हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।
श्रीरघुनाथ रूप उर आवा। परमानंद अमित सुख पावा।।
स्रोत अभिलेख 1.111 · पुस्तक पृ. 124, 125
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीमहादेवजीके हृदयमें सारे रामचरित्र आ गये। प्रेमके मारे उनका शरीर पुलकित हो गया और नेत्रोंमें जल भर आया। श्रीरघुनाथजीका रूप उनके हृदयमें आ गया, जिससे स्वयं परमानन्दस्वरूप शिवजीने भी अपार सुख पाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 124 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।
English explanation
All of Rama’s deeds arose in Shiva’s heart; love made him thrill, and tears filled his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हर | शिव के | Shiva’s |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| रामचरित | राम के चरित; राम की लीलाएँ | Rama’s deeds and story |
| सब | सभी | all |
| आए | उभर आए | came to mind |
| प्रेम | प्रेम से | through love |
| पुलक | रोमांच हुआ | a thrill; hair standing on end |
| लोचन | आँखों में | in the eyes |
| जल | आँसू | tears |
| छाए | भर आए | welled up |
2 श्रीरघुनाथ रूप उर आवा। परमानंद अमित सुख पावा।।
English explanation
The form of Lord Rama appeared in Shiva’s heart, and he experienced the boundless joy of supreme bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीरघुनाथ | श्रीराम का, रघुवंश के स्वामी का | of Lord Rama, lord of Raghu’s lineage |
| रूप | स्वरूप | form |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आवा | आया; प्रकट हुआ | appeared |
| परमानंद | परम आनंद का | of supreme bliss |
| अमित | असीम | boundless |
| सुख | सुख | joy |
| पावा | पाया; अनुभव किया | experienced; attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 124
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 124, 125
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