बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।
मूल पाठ
तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।
प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.111 · पुस्तक पृ. 124, 125
भावार्थ
मूल पाठ के बादवेदोंने आपको तीनों लोकोंका गुरु कहा है। दूसरे पामर जीव इस रहस्यको क्या जानें! पार्वतीजीके सहज सुन्दर और छलरहित (सरल) प्रश्न सुनकर शिवजीके मनको बहुत अच्छे लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 124 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।
English explanation
The Vedas proclaim you the teacher of the three worlds; what could any other, lowly creature know?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आपको; आप | you |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| गुर | गुरु | teacher |
| बेद | वेदों ने | the Vedas |
| बखाना | कहा है | have proclaimed |
| आन | अन्य | other |
| जीव | जीव; प्राणी | living being; creature |
| पाँवर | अल्पज्ञ; तुच्छ | ignorant; lowly |
| का | क्या | what |
| जाना | जान सकता है | could know |
2 प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई।।
English explanation
Hearing Uma’s naturally pleasing, guileless questions delighted Shiva’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रस्न | प्रश्न | questions |
| उमा | उमा, पार्वती | Uma, Goddess Parvati |
| कै | के | of; belonging to |
| सहज | स्वभाव से; सहज ही | naturally |
| सुहाई | सुंदर; मनोहर | pleasing; lovely |
| छल | कपट | deceit |
| बिहीन | से रहित | free from |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिव | शिव के | Shiva’s |
| मन | मन को | to the heart |
| भाई | भाए; प्रिय लगे | were pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 124
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 124, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।