बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[इसके सिवा] श्रीरामचन्द्रजीके और भी जो अनेक रहस्य (छिपे हुए भाव अथवा चरित्र) हैं, उनको कहिये। हे नाथ! आपका ज्ञान अत्यन्त निर्मल है। हे प्रभो! जो बात मैंने न भी पूछी हो, हे दयालु! उसे भी आप छिपा न रखियेगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 124 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।
जो प्रभु मैं पूछा नहि होई। सोउ दयाल राखहु जनि गोई।।
स्रोत अभिलेख 1.111 · पुस्तक पृ. 124, 125
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।
English explanation
O Lord, also explain the many other mysteries concerning Rama with utterly clear discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| औरउ | अन्य भी | others also |
| राम | भगवान राम से संबंधित | concerning Lord Rama |
| रहस्य | गूढ़ बातें | mysteries; profound matters |
| अनेका | अनेक | many |
| कहहु | बताइए | please explain |
| नाथ | हे स्वामी, शिव | O Lord Shiva |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिमल | निर्मल; स्पष्ट | pure; clear |
| बिबेका | विवेक के साथ | with discernment |
2 जो प्रभु मैं पूछा नहि होई। सोउ दयाल राखहु जनि गोई।।
English explanation
Lord, whatever I may not have asked, compassionate one, do not keep that hidden either.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो बात | whatever matter |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| मैं | मैंने | I |
| पूछा | पूछी | asked |
| नहि | नहीं | not |
| होई | हो | may have |
| सोउ | उसे भी | that too |
| दयाल | हे दयालु | O compassionate one |
| राखहु | रखिए | keep |
| जनि | मत | do not |
| गोई | छिपाकर | hidden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 124
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 124, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।