बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।
भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। पुनि सब बरनहु सहित बिभागा।।
स्रोत अभिलेख 1.111 · पुस्तक पृ. 124, 125
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभु! फिर आप उस तत्त्वको समझाकर कहिये, जिसकी अनुभूतिमें ज्ञानी मुनिगण सदा मग्र रहते हैं; और फिर भक्ति, ज्ञान, विज्ञान और वैराग्यका विभागसहित वर्णन कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 124 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।
English explanation
AI draft: Further, Lord, explain that truth in whose realized understanding wise sages remain absorbed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर; आगे | further; next |
| प्रभु | हे प्रभु, शिव | O Lord Shiva |
| कहहु | कहिए | please tell |
| सो | उस | that |
| तत्व | यथार्थ सत्य | essential truth |
| बखानी | विस्तार से समझाकर | explaining fully |
| जेहिं | जिसके | whose |
| बिग्यान | अनुभवजन्य ज्ञान में | in realized knowledge |
| मगन | मग्न रहते हैं | remain absorbed |
| मुनि | मुनि | sages |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise; possessing knowledge |
2 भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। पुनि सब बरनहु सहित बिभागा।।
English explanation
Then describe devotion, knowledge, realized knowledge, and detachment, each with its distinctions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिग्यान | अनुभव से पुष्ट ज्ञान | realized knowledge |
| बिरागा | वैराग्य; आसक्ति का त्याग | detachment; freedom from attachment |
| पुनि | फिर; आगे | then; further |
| सब | इन सबका | all of these |
| बरनहु | वर्णन कीजिए | please describe |
| सहित | साथ में | together with |
| बिभागा | भेदों और विभागों के | their distinctions and divisions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 124
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 124, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।