बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो भगवान् विष्णु और महादेवजीसे विमुख हैं और जिनकी धर्ममें प्रीति नहीं है, वे लोग स्वप्रमें भी वहाँ नहीं जा सकते। उस पर्वतपर एक विशाल बरगदका पेड़ है, जो नित्य नवीन और सब काल (छहों ऋतुओं) में सुन्दर रहता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 120 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।
तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला।।
स्रोत अभिलेख 1.106 · पुस्तक पृ. 120, 120
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Those who turn away from Vishnu and Shiva and have no love for dharma do not go there even in dreams.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| हर | भगवान शिव | Lord Shiva |
| बिमुख | से विमुख | turned away from |
| धर्म | धर्म में | in dharma; righteous conduct |
| रति | प्रेम, अनुराग | love, attachment |
| नाहीं | नहीं है | have none |
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | people |
| तहँ | वहाँ | there |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| नहिं | नहीं | not |
| जाहीं | जाते हैं | go |
2 तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला।।
English explanation
On that mountain stands a vast banyan tree, ever fresh and beautiful at all times.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| पर | पर | on |
| बट | बरगद | banyan |
| बिटप | वृक्ष | tree |
| बिसाला | विशाल | vast |
| नित | सदा | always |
| नूतन | नया, ताज़ा | fresh, renewed |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सब | सभी | all |
| काला | समयों में | at times |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 120
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 120, 120
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।