बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।
मूल पाठ
त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।
एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.106 · पुस्तक पृ. 120, 120
भावार्थ
मूल पाठ के बादवहाँ तीनों प्रकारकी (शीतल, मन्द और सुगन्ध) वायु बहती रहती है और उसकी छाया बड़ी ठंडी रहती है। वह शिवजीके विश्राम करनेका वृक्ष है, जिसे वेदोंने गाया है। एक बार प्रभु श्रीशिवजी उस वृक्षके नीचे गये और उसे देखकर उनके हृदयमें बहुत आनन्द हुआ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 120 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।
English explanation
There are breezes with three pleasing qualities and deeply cooling shade; the Vedas sing of the tree as Shiva’s resting place.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली | having three qualities |
| समीर | हवा | breeze |
| सुसीतलि | अत्यंत शीतल | very cool |
| छाया | छाया | shade |
| सिव | शिव का | Shiva’s |
| बिश्राम | विश्राम-स्थान | resting place |
| बिटप | वृक्ष को | the tree |
| श्रुति | वेदों ने | the Vedas |
| गाया | गाया, वर्णित किया | sung of, described |
2 एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ।।
English explanation
Once Lord Shiva went beneath that tree. Seeing it brought great joy to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | बार, अवसर पर | occasion |
| तेहि | उसके | that tree’s |
| तर | नीचे | beneath |
| प्रभु | प्रभु शिव | Lord Shiva |
| गयऊ | गए | went |
| तरु | वृक्ष को | the tree |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| उर | हृदय में | in his heart |
| अति | बहुत | great |
| सुखु | आनंद | joy |
| भयऊ | हुआ | arose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 120
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 120, 120
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।