बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।
मूल पाठ
निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।
कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.106 · पुस्तक पृ. 120, 120
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपने हाथसे बाघम्बर बिछाकर कृपालु शिवजी स्वभावसे ही (बिना किसी खास प्रयोजनके) वहाँ बैठ गये। कुन्दके पुष्प, चन्द्रमा और शंखके समान उनका गौर शरीर था। बड़ी लंबी भुजाएँ थीं और वे मुनियोंके-से (वल्कल) वस्त्र धारण किये हुए थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 120 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।
English explanation
Spreading a tiger skin with his own hand, compassionate Shiva sat down at ease.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | his own |
| कर | हाथ से | with his hand |
| डासि | बिछाकर | having spread |
| नागरिपु | बाघ की | a tiger’s |
| छाला | खाल | skin |
| बैठै | बैठ गए | sat down |
| सहजहिं | सहज ही, आराम से | naturally, at ease |
| संभु | शंभु, भगवान शिव | Shambhu, Lord Shiva |
| कृपाला | कृपालु | compassionate |
2 कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा।।
English explanation
His body is fair as jasmine, the moon, and a conch; his arms are long, and he wears ascetics’ bark-cloth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंद | श्वेत कुंद फूल | white jasmine flower |
| इंदु | चंद्रमा | moon |
| दर | शंख | conch shell |
| गौर | श्वेत, उज्ज्वल | fair, radiant |
| सरीरा | शरीर | body |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| प्रलंब | लंबी | long |
| परिधन | पहनावा | attire |
| मुनिचीरा | मुनियों के वल्कल-वस्त्र | ascetics’ bark-cloth garments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 120
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 120, 120
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।