बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।
मूल पाठ
हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।
तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।
स्रोत अभिलेख 1.165 · पुस्तक पृ. 169, 169
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा उसके वचन सुनकर बड़ा प्रसन्न हुआ और कहने लगा—हे स्वामी! मेरा नाश अब नहीं होगा। हे कृपानिधान प्रभु! आपकी कृपासे मेरा सब समय कल्याण होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 169 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।
English explanation
The king rejoiced on hearing his words and said, “O master, now I shall not be destroyed.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषेउ | प्रसन्न हुआ | rejoiced |
| राउ | राजा | the king |
| बचन | वचन; बात | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| तासू | उसके | his |
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| न | नहीं | not |
| होइ | होगा | will occur |
| मोर | मेरा | my |
| अब | अब | now |
| नासू | नाश | destruction |
2 तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।
English explanation
O master, treasury of compassion, through your grace I shall always fare well.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| प्रभु | हे स्वामी | O master |
| कृपानिधाना | हे कृपा के भंडार | O treasury of compassion |
| मो | मुझ | me |
| कहुँ | को; के लिए | to; for |
| सर्ब | सभी | all |
| काल | समयों में | at times |
| कल्याना | कल्याण; भलाई | well-being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.165
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 169
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 169, 169
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।