बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।
मूल पाठ
हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।
जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 104, 105
भावार्थ
मूल पाठ के बादकिन्तु हमारी समझसे तो शिवजी सदासे ही योगी, अजन्मा, अनिन्द्य, कामरहित और भोगहीन हैं और यदि मैंने शिवजीको ऐसा समझकर ही मन, वचन और कर्मसे प्रेमसहित उनकी सेवा की है—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 104 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।
English explanation
In my understanding, Shiva is eternally a yogi—unborn, faultless, desireless, and uninvolved in sensual enjoyment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हमरें | मेरी | my |
| जान | समझ में | in the understanding of |
| सदा | सदा | always |
| सिव | शिव | Shiva |
| जोगी | योगी | a yogi |
| अज | अजन्मा | unborn |
| अनवद्य | निर्दोष | faultless |
| अकाम | कामना से रहित | free from desire |
| अभोगी | भोगों से असंपृक्त | uninvolved in sensual enjoyment |
2 जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।।
English explanation
If, knowing Shiva to be thus, I have served him lovingly in deed, mind, and speech,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| मैं | मैंने | I |
| सिव | शिव की | Shiva |
| सेये | सेवा की है | have served |
| अस | ऐसा | thus |
| जानी | जानकर | knowing |
| प्रीति | प्रेम | love |
| समेत | सहित | with |
| कर्म | कर्म से | in deed |
| मन | मन से | in mind |
| बानी | वाणी से | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 104
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 104, 105
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।