बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्याम और गौर शरीरवाली दोनों सुन्दर जोडिय़ोंकी शोभाको देखकर माताएँ तृण तोड़ती हैं [जिसमें दीठ न लग जाय]। यों तो चारों ही पुत्र शील, रूप और गुणके धाम हैं, तो भी सुखके समुद्र श्रीरामचन्द्रजी सबसे अधिक हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 198 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।
चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।।
स्रोत अभिलेख 1.198 · पुस्तक पृ. 197, 198
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।
English explanation
Both pairs of dark- and fair-complexioned boys were beautiful; their mothers gazed at their loveliness and snapped blades of grass in a protective gesture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्याम | साँवले | dark-complexioned |
| गौर | गोरे | fair-complexioned |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| दोउ | दोनों | both |
| जोरी | जोड़ियाँ | pairs |
| निरखहिं | निहारती हैं | gaze at |
| छबि | सुंदर छवि | loveliness |
| जननीं | माताएँ | mothers |
| तृन | तिनके | blades of grass |
| तोरी | तोड़कर | snapping |
2 चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।।
English explanation
All four were abodes of good character, beauty, and virtues; yet Rama was an even greater ocean of joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारिउ | चारों | all four |
| सील | सुशीलता; सदाचार | good character |
| रूप | सौंदर्य | beauty |
| गुन | सद्गुण | virtues |
| धामा | धाम; भंडार | abodes; repositories |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| अधिक | अधिक; बढ़कर | greater; surpassing |
| सुखसागर | आनंद के सागर | an ocean of joy |
| रामा | राम | Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 198
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 197, 198
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।