बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।
मूल पाठ
बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।
भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 1.198 · पुस्तक पृ. 197, 198
भावार्थ
मूल पाठ के बादबचपनसे ही श्रीरामचन्द्रजीको अपना परम हितैषी स्वामी जानकर लक्ष्मणजीने उनके चरणोंमें प्रीति जोड़ ली। भरत और शत्रुघ्न दोनों भाइयोंमें स्वामी और सेवककी जिस प्रीतिकी प्रशंसा है वैसी प्रीति हो गयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 197 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।
English explanation
From childhood, Lakshmana recognized Rama as his benevolent lord and cherished love for his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारेहि | बचपन ही | childhood itself |
| ते | से | from |
| निज | अपना | his own |
| हित | हितकारी | benevolent; caring for his welfare |
| पति | स्वामी | lord |
| जानी | जानकर | recognizing |
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| राम | राम के | of Rama |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| रति | प्रेम; अनुराग | loving attachment |
| मानी | रखा; अपनाया | cherished |
2 भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।।
English explanation
The two brothers, Bharata and Shatrughna, shared a deep love like that between a lord and his servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सत्रुहन | शत्रुघ्न | Shatrughna, Rama’s brother |
| दूनउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| प्रभु | स्वामी | lord; master |
| सेवक | सेवक | servant |
| जसि | जैसी | such as; like |
| प्रीति | प्रेम | love |
| बड़ाई | गहराई; महानता | depth; greatness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 197
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 197, 198
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।