बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरुजीने हृदयमें विचारकर ये नाम रखे [और कहा—] हे राजन्! तुम्हारे चारों पुत्र वेदके तत्त्व (साक्षात् परात्पर भगवान्) हैं। जो मुनियोंके धन, भक्तोंके सर्वस्व और शिवजीके प्राण हैं, उन्होंने [इस समय तुम लोगोंके प्रेमवश] बाललीलाके रसमें सुख माना है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 197 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।
मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।।
स्रोत अभिलेख 1.198 · पुस्तक पृ. 197, 198
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।
English explanation
After reflecting inwardly, the preceptor gave them names and said, “O king, your four sons embody the essence of the Vedas.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरे | रखे | gave; assigned |
| नाम | नाम | names |
| गुर | गुरु वसिष्ठ ने | the preceptor Vasistha |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| बिचारी | विचार करके | having reflected |
| बेद | वेदों के | of the Vedas |
| तत्व | सारतत्त्व | essential truths |
| नृप | हे राजन् | O king |
| तव | तुम्हारे | your |
| सुत | पुत्र | sons |
| चारी | चारों | all four |
2 मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।।
English explanation
He who is the sages’ treasure, the devotees’ all-in-all, and dear as life to Shiva found joy in childhood play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of the sages |
| धन | धन; अनमोल संपदा | treasure |
| जन | भक्तजनों के | of the devotees |
| सरबस | सर्वस्व | all-in-all |
| सिव | शिव के | of Shiva |
| प्राना | प्राणप्रिय | dear as life |
| बाल | बाल्यावस्था की | of childhood |
| केलि | क्रीड़ा में | in play |
| तेहिं | उन्हीं राम ने | that very Rama |
| सुख | आनंद | joy |
| माना | अनुभव किया | found; experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.198
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 197
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 197, 198
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।