बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुकुमार किशोर अवस्थावाले, श्याम और गौर वर्णके दोनों कुमार नेत्रोंको सुख देनेवाले और सारे विश्वके चित्तको चुरानेवाले हैं। जब रघुनाथजी आये तब सभी [उनके रूप एवं तेजसे प्रभावित होकर] उठकर खड़े हो गये। विश्वामित्रजीने उनको अपने पास बैठा लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 213 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।
उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।।
स्रोत अभिलेख 1.215 · पुस्तक पृ. 213, 213
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।
English explanation
One dark-complexioned and the other fair, they were tender youths, pleasing to the eyes and captivating the hearts of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्याम | श्याम वर्ण के राम | dark-complexioned Rama |
| गौर | गौर वर्ण के लक्ष्मण | fair-complexioned Lakshmana |
| मृदु | कोमल | tender |
| बयस | आयु / अवस्था | age |
| किसोरा | किशोर | youthful |
| लोचन | आँखों को | to the eyes |
| सुखद | सुख देने वाले | delightful |
| बिस्व | संसार के | of the world |
| चित | मन | hearts |
| चोरा | मोह लेने वाले | captivators |
2 उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।।
English explanation
When Rama arrived, everyone rose. Vishvamitra seated the two brothers beside him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठे | उठ खड़े हुए | rose to their feet |
| सकल | सब | everyone |
| जब | जब | when |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| आए | आए | arrived |
| बिस्वामित्र | विश्वामित्र मुनि ने | the sage Vishvamitra |
| निकट | अपने पास | beside himself |
| बैठाए | बैठाया | seated them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.215
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 213
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 213, 213
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।