बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।
मूल पाठ
कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।
तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।।
स्रोत अभिलेख 1.215 · पुस्तक पृ. 213, 213
भावार्थ
मूल पाठ के बादबार-बार कुशलप्रश्न करके विश्वामित्रजीने राजाको बैठाया। उसी समय दोनों भाई आ पहुँचे, जो फुलवाड़ी देखने गये थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 213 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।
English explanation
After repeatedly asking about his well-being, Vishvamitra seated the king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| प्रस्न | प्रश्न | inquiries |
| कहि | कहकर / पूछकर | voicing / asking |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | times |
| बिस्वामित्र | विश्वामित्र मुनि ने | the sage Vishvamitra |
| नृपहि | राजा को | the king |
| बैठारा | बैठाया | seated |
2 तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।।
English explanation
At that moment the two brothers arrived; they had gone to see the flower garden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | moment |
| आए | आए | arrived |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| गए | गए | gone |
| रहे | थे | had |
| देखन | देखने | to see |
| फुलवाई | फूलों की वाटिका | the flower garden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.215
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 213
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 213, 213
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।