बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।
मूल पाठ
कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।
बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।।
स्रोत अभिलेख 1.215 · पुस्तक पृ. 213, 213
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने मुनिके चरणोंपर मस्तक रखकर प्रणाम किया। मुनियोंके स्वामी विश्वामित्रजीने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया। फिर सारी ब्राह्मणमण्डलीको आदरसहित प्रणाम किया और अपना बड़ा भाग्य जानकर राजा आनन्दित हुए॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 213 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।
English explanation
AI draft: King Janaka bowed, placing his head at the sage’s feet. The delighted foremost sage, Vishvamitra, blessed him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया | performed |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| धरि | रखकर | placing |
| माथा | माथा | his head |
| दीन्हि | दिया | gave |
| असीस | आशीर्वाद | a blessing |
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| मुनिनाथा | मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र ने | the foremost sage, Vishvamitra |
2 बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।।
English explanation
The king respectfully bowed to all the Brahmins and rejoiced, recognizing his great good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रबृंद | ब्राह्मणों के समूह को | the assembly of Brahmins |
| सब | सभी | all |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| बंदे | प्रणाम किया | bowed to |
| जानि | जानकर | recognizing |
| भाग्य | अपना सौभाग्य | his good fortune |
| बड़ | बड़ा | great |
| राउ | राजा जनक | King Janaka |
| अनंदे | आनंदित हुए | rejoiced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.215
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 213
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 213, 213
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।