बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।
मूल पाठ
सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।
अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।
स्रोत अभिलेख 1.67 · पुस्तक पृ. 85, 86
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पर्वतराज! तुम्हारी कन्या सुलच्छनी है। अब इसमें जो दो-चार अवगुण हैं, उन्हें भी सुन लो। गुणहीन, मानहीन, माता-पिता-विहीन, उदासीन, संशयहीन (लापरवाह),॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 85 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।
English explanation
O mountain king, your daughter bears auspicious marks; now hear the few shortcomings there are.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सैल | हे पर्वतराज हिमवान | O Himavan, king of mountains |
| सुलच्छन | शुभ लक्षणों वाली | bearing auspicious marks |
| सुता | पुत्री | daughter |
| तुम्हारी | तुम्हारी | your |
| सुनहु | सुनो | listen |
| जे | जो | which; that |
| अब | अब | now |
| अवगुन | दोष; अवगुण | faults; shortcomings |
| दुइ | दो | two |
| चारी | चार | four |
2 अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।
English explanation
Her future husband will be without attributes or conventional virtues, without honor or pride, without mother or father, detached, and free of all doubts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगुन | गुणरहित; गुणों से परे | without qualities; beyond attributes |
| अमान | मान-सम्मान से रहित; अभिमानरहित | without honor; free of pride |
| मातु | माता | mother |
| पितु | पिता | father |
| हीना | से रहित | without |
| उदासीन | विरक्त; अनासक्त | detached; dispassionate |
| सब | सभी | all |
| संसय | संशय | doubts |
| छीना | नष्ट हुए; मिटे हुए | dispelled; eliminated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 85
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 85, 86
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।