बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।
मूल पाठ
होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।
एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।।
स्रोत अभिलेख 1.67 · पुस्तक पृ. 85, 86
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सारे जगत्में पूज्य होगी और इसकी सेवा करनेसे कुछ भी दुर्लभ न होगा। संसारमें स्त्रियाँ इसका नाम स्मरण करके पतिव्रतरूपी तलवारकी धारपर चढ़ जायँगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 85 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।
English explanation
She will be revered throughout the world; through serving her, nothing will be unattainable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहि | होगी | will be |
| पूज्य | पूजनीय | worthy of worship |
| सकल | समस्त | entire |
| जग | संसार | world |
| माहीं | में | in |
| एहि | इसकी | her |
| सेवत | सेवा करने पर | upon serving |
| कछु | कुछ भी | anything |
| दुर्लभ | दुर्लभ; अप्राप्य | hard to obtain; unattainable |
| नाहीं | नहीं | not |
2 एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।।
English explanation
Remembering her name, women in the world will tread the sword-edge-like path of fidelity to their husbands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इसका | her |
| कर | का | possessive marker |
| नामु | नाम | name |
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| संसारा | संसार में | in the world |
| त्रिय | स्त्रियाँ | women |
| चढ़हहिं | चढ़ेंगी; चलेंगी | will ascend; will tread |
| पतिब्रत | पति के प्रति निष्ठा का व्रत | the vow of fidelity to one's husband |
| असिधारा | तलवार की धार जैसा कठिन मार्ग | a path as difficult as a sword's edge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 85
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 85, 86
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