बालकाण्ड · दोहा 67 · दोहा/सोरठा
जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।
जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।
अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेख।।67।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.67 · पुस्तक पृ. 85, 86
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।
वह योगी, जटाधारी, मन में कामनारहित, नग्न और अमंगल वेश वाला होगा।
English explanation
He will be a yogi with matted hair, desireless in mind, naked, and dressed in an inauspicious guise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोगी | योगी | a practitioner of yoga |
| जटिल | जटाधारी | having matted hair |
| अकाम | कामनारहित | free of desire |
| मन | मन में | in mind |
| नगन | नग्न | naked |
| अमंगल | अशुभ दिखने वाला | inauspicious-looking |
| बेष | वेश; पहनावा | guise; attire |
2 अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेख।।67।।
इसे ऐसा पति मिलेगा; इसके हाथ में ऐसी रेखा पड़ी है।
English explanation
She will receive such a husband; such a line is marked on her hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| स्वामी | पति | husband |
| एहि | इस कन्या | this maiden |
| कहँ | को | to |
| मिलिहि | मिलेगा | will obtain; will be given |
| परी | पड़ी है; अंकित है | is marked |
| हस्त | हाथ में | on the hand |
| असि | ऐसी | such |
| रेख | रेखा | line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 67
- स्रोत अभिलेख
- 1.67
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 85, 86
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