बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।
मूल पाठ
सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।
नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।।
स्रोत अभिलेख 1.298 · पुस्तक पृ. 281, 282
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब घोड़े बड़े ही सुन्दर और चञ्चल करनी (चाल) के हैं। वे धरतीपर ऐसे पैर रखते हैं जैसे जलते हुए लोहेपर रखते हों। अनेकों जातिके घोड़े हैं, जिनका वर्णन नहीं हो सकता। [ ऐसी तेज चालके हैं] मानो हवाका निरादर करके उडऩा चाहते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 282 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।
English explanation
All the horses were handsome and exceedingly restless in movement; as they set their feet on the ground, they reacted as though it burned like hot iron.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुभग | सुंदर | handsome |
| सकल | सभी | all |
| सुठि | अत्यंत | very; exceedingly |
| चंचल | चपल; चंचल | restless; lively |
| करनी | चाल-चेष्टा | movements; behavior |
| अय | लोहा | iron |
| इव | के समान; मानो | like; as though |
| जरत | जलते; जलन अनुभव करते | burning; feeling scorched |
| धरत | रखते हुए | placing |
| पग | पाँव | feet; hooves |
| धरनी | धरती पर | on the ground |
2 नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।।
English explanation
They belonged to so many breeds that they could not all be described. They seemed to scorn the wind itself and wish to take flight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक प्रकार की | many different |
| जाति | नस्लें | breeds |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | जा सकतीं | can be |
| बखाने | वर्णित | described |
| निदरि | तुच्छ समझकर; उपेक्षा करके | scorning; disregarding |
| पवनु | हवा को | the wind |
| जनु | मानो | as though |
| चहत | चाहते थे | wished |
| उड़ाने | उड़ जाना | to fly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.298
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 282
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 281, 282
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।