बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।
मूल पाठ
सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।
जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.343 · पुस्तक पृ. 325, 326
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उन्होंने कहा—] हे मुनीश्वर! सुनिये, आपके सुन्दर दर्शनसे कुछ भी दुर्लभ नहीं है, मेरे मनमें ऐसा विश्वास है। जो सुख और सुयश लोकपाल चाहते हैं; परन्तु [असम्भव समझकर] जिसका मनोरथ करते हुए सकुचाते हैं,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 326 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।
English explanation
Listen, O exalted lord of sages! Through seeing you, nothing remains unattainable—such is the conviction in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| मुनीस | हे मुनियों के स्वामी | O lord of sages |
| बर | श्रेष्ठ | exalted |
| दरसन | दर्शन से | through seeing |
| तोरें | आपके | you; your |
| अगमु | अप्राप्य; पहुँच से परे | unattainable |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| प्रतीति | विश्वास | conviction |
| मन | मन में | in the heart |
| मोरें | मेरे | my |
2 जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं।।
English explanation
The happiness and noble renown that the rulers of the worlds desire, yet hesitate even to wish for—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिस | which |
| सुखु | सुख | happiness |
| सुजसु | उत्तम यश | noble renown |
| लोकपति | लोकों के अधिपति | rulers of the worlds |
| चहहीं | चाहते हैं | desire |
| करत | करते हुए | while making |
| मनोरथ | कामना | a wish |
| सकुचत | संकोच करते | hesitate |
| अहहीं | हैं | are; do |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.343
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 326
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 326
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।