बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।
मूल पाठ
बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।
जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई।।
स्रोत अभिलेख 1.343 · पुस्तक पृ. 325, 326
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकजीकी बार-बार विनती और बड़ाई करके श्रीरघुनाथजी सब भाइयोंके साथ चले। जनकजीने जाकर विश्वामित्रजीके चरण पकड़ लिये और उनके चरणोंकी रजको सिर और नेत्रोंमें लगाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 325 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।
English explanation
After repeatedly offering respectful words and praise, Rama departed with all his brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; मिलकर: बार-बार | time; together: repeatedly |
| करि | करके | having offered |
| बिनय | विनय; नम्र निवेदन | respectful entreaty |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| चले | चले; प्रस्थान किया | departed |
| संग | साथ | with |
| सब | सभी | all |
| भाई | भाई | brothers |
2 जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई।।
English explanation
Janaka went and clasped Vishvamitra’s feet, applying their dust to his head and eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक | King Janaka |
| गहे | पकड़े | clasped |
| कौसिक | कुशिकवंशी ऋषि विश्वामित्र के | of Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| पद | चरण | feet |
| जाई | जाकर | having gone |
| चरन | चरणों की | of the feet |
| रेनु | धूल | dust |
| सिर | सिर पर | on his head |
| नयनन्ह | आँखों पर | on his eyes |
| लाई | लगाई | applied |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.343
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 325
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 326
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