बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।
मूल पाठ
सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।
कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.343 · पुस्तक पृ. 325, 326
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! वही सुख और सुयश मुझे सुलभ हो गया; सारी सिद्धियाँ आपके दर्शनोंकी अनुगामिनी अर्थात् पीछे-पीछे चलनेवाली हैं। इस प्रकार बार-बार विनती की और सिर नवाकर तथा उनसे आशीर्वाद पाकर राजा जनक लौटे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 326 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।
English explanation
O master, that very happiness and noble renown are readily available to me. All attainments follow upon beholding you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that very |
| सुखु | सुख | happiness |
| सुजसु | उत्तम यश | noble renown |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily attainable |
| मोहि | मुझे | to me |
| स्वामी | हे स्वामी | O master |
| सब | सभी | all |
| सिधि | सिद्धियाँ; सफल उपलब्धियाँ | attainments; accomplishments |
| तव | आपके | your |
| दरसन | दर्शन की | of beholding you |
| अनुगामी | पीछे आने वाली | following upon |
2 कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई।।
English explanation
Janaka offered humble entreaties, bowing his head repeatedly, and the king returned after receiving blessings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्हि | की | made; offered |
| बिनय | नम्र निवेदन | humble entreaty |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर; मिलकर: बार-बार | again; together: repeatedly |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| फिरे | लौट गए | returned |
| महीसु | पृथ्वी के स्वामी राजा जनक | King Janaka, lord of the land |
| आसिषा | आशीर्वाद | blessings |
| पाई | पाकर | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.343
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 326
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 326
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।