बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।
मूल पाठ
चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।
रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी।।
स्रोत अभिलेख 1.343 · पुस्तक पृ. 325, 326
भावार्थ
मूल पाठ के बादडंका बजाकर बारात चली। छोटे-बड़े सभी समुदाय प्रसन्न हैं। [रास्तेके] गाँवोंके स्त्री-पुरुष श्रीरामचन्द्रजीको देखकर नेत्रोंका फल पाकर सुखी होते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 326 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।
English explanation
The wedding procession set out with kettledrums sounding; everyone, small and great, was joyful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चली | चली; रवाना हुई | set out |
| बरात | विवाह की बरात | wedding procession |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
| बजाई | बजाकर; बजाते हुए | sounding; playing |
| मुदित | आनंदित | joyful |
| छोट | छोटे | small; lesser |
| बड़ | बड़े | great; greater |
| सब | सभी | all |
| समुदाई | लोगों के समूह | groups of people |
2 रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी।।
English explanation
Seeing Rama, the men and women of the villages receive the fulfillment of their sight and become happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | श्रीराम को | Rama |
| निरखि | देखकर | having beheld |
| ग्राम | गाँवों के | of the villages |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| पाइ | पाकर | having received |
| नयन | आँखों का | of their eyes |
| फलु | फल; सार्थकता | reward; fulfillment |
| होहिं | होते हैं | become |
| सुखारी | सुखी | happy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.343
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 326
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 326
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।